पहले मेरे दिल को कुछ काम था,
तेरा इंतज़ार जो उसको सुबह शाम था।
तू आये..... तू आये......
सोच सोच कर परेशां था।
आज तेरे एक शब्द ने तार तार कर डाले उस दिल के तार,
जो हर पल माला जपने में मस्त था,
जब जाना, तेरे पास तो तेरा दिल था ही नहीं,
वो खुद किसी और की माला जपने में व्यस्त था।
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