"शरणार्थी हूँ"
आज मैं शरणार्थी हूँ ,
देश अपना छोड़,
आत्मा भीतर से तोड़ ,
आज मैं शरणार्थी हूँ
माँ ने बताया था,
पृथ्वी पर हम भार हैं ,
ईश ने ऐसा क्यों रचा की
आज मैं शरणार्थी हूँ ,
नहीं ज्ञात क्या अधिकार हैं ,
क्या कर्तव्य हैं, मैं बेज़ार हूँ ,
आज मैं शरणार्थी हूँ।
कौन सा देश मेरा है ?
जहां पैदा हुआ था या
जिसने सहारा दिया?
प्रश्न आज उठा क्यूंकि
आज मैं शरणार्थी हूँ।
विडम्बना तो देख "करिश्मा"
जहां पैदा हुआ,उसने निष्कासित किया,
जहां सहारा मिला ,उसने प्रताड़ित किया ,
आत्मा से भी परे हूँ, क्यूंकि
आज मैं शरणार्थी हूँ।
मेरा मासूम बालक
इस देश का होगा या उस देश का
प्रश्नचिन्ह के साथ जीवन है,
आज मैं शरणार्थी हूँ ।
देवकी ने मानो जनम दिया
यशोदा ने जैसे पाला है
पर मैं कृष्ण तो नहीं
आज मैं शरणार्थी हूँ।
(करिश्मा)