Saturday, August 22, 2020
Tuesday, August 18, 2020
क्या कहूं ?
पहले मेरे दिल को कुछ काम था,
तेरा इंतज़ार जो उसको सुबह शाम था।
तू आये..... तू आये......
सोच सोच कर परेशां था।
आज तेरे एक शब्द ने तार तार कर डाले उस दिल के तार,
जो हर पल माला जपने में मस्त था,
जब जाना, तेरे पास तो तेरा दिल था ही नहीं,
वो खुद किसी और की माला जपने में व्यस्त था।
आस
घर के कोने आज उदास से हैं,
बाग़ का फूल जो गिर गया है…
उसकी जगह तो शायद कोई दूसरा फूल ले लेगा,
पर, तेरा हाल उससे भी बदतर है।
शायद…..
आज भी उस बाग़ को तेरी एक नज़र की आस है,
लेकिन ….
दिल तेरा किसी और के पास है।
30.11.1994
मोह
तुझसे भली तो खुशबु है फूलों की,
उसका काल तो ज्ञात होता है,
दो दिन में फूल मुरझा कर झड़ जाता है
मोह- भंग संग उसके शीघ्र हो जाता है,
शायद,
तुझ से मोह..... मेरा संग छोड़ने वाला है।
30.11.1994
"चले जाओगे"
तुम आओगे,
मालूम
है
मुझे
.....
हाथ
प्यार
का
दिल
पर
रखकर …
दो
बोल
प्यार
के
बोलकर….
पल
पल
घड़ी
में
पल
देखकर….
मेरे
व्याकुल
हृदय
को
तोड़कर ….
पुन:
चले
जाओगे
मुझे
छोड़कर।
- करिश्मा पाल
30.11.1994
शायद! तुम आने वाले हो।
शायद
खुशबू अच्छी है…… पास आ रही है,
तन्हाई भी अच्छी है..... दूर जा रही है।
प्रेम की छाया भी प्रकाश को चीरती,
डरती- सहमती ही सही, आज पास आ रही है,
शायद! तुम आने वाले हो।
- करिश्मा पाल
30.11.1994