Wednesday, March 4, 2026

मैं

आज यूँ ही जब ज़िन्दगी की बही को टटोला,एक एक पन्ना धूल में सना मिला,

जिंदगी की ऊँचाइयों और निचाईयों के चक्र में उलझ कर इसकी जांच ही नहीं की कभी,

एक पन्ने पर रिश्तों की गणना में एक एक कर सभी गलतियाँ ही मिलीं,

रह गयी, एक अकेली मैं, फिर उसी मुकाम पर

जहां से जनम लिया था ,एक छोटे से कमरे में.....मैं॥

- करिश्मा पाल

Tuesday, January 6, 2026

चांद...तो तुम ही हो!

चांद तो तुम खुद ही हो सुंदरी...
जाओ...जाकर निहार लो आईने में...

ऊपर वाला चांद तो हरजाई है
जब देखना चाहो 
बस
तब ही नखरे दिखाता है।

उससे भी क्या शिकायत करना...
खुद को निहार लो, आईने में..
चांद फिर खुद ही शरमा जाएगा!