Monday, June 22, 2020

काश

                    काश 
काश मैं पंछी होती,
फुर्र से विचलती मचलती स्वच्छंद नभ में,
तिनका- तिनका जोड़, नीड़ बनाती, 
स्वतंत्रता से पंख फैलाये इठलाती घूमती। 

काश मैं तितली होती,
फूलों का रंग मेरा अपना होता,
गुलाब- चमेली मेरी सहेली होतीं, 
पराग फूलों का ले झोली भर्ती,
एक फूल से दूजे पर मद मस्त उड़ती रहती। 

काश मैं चील होती,
आकाश की ऊंचाई से दुश्मन दबोचने में सक्षम होती,
असलियत सबकी सामने होती, तो 
किसी से कोई इक्षा-तमन्ना भी न होती। 

काश कि मैं मैं न होती,
वो होती जो मैं नहीं हूँ, 
फिर जैसी भी मैं होती,
संभवत: या निश्चितत:
आज से तो मैं बेहतर ही होती. 

- करिश्मा पाल 
06.09.1996 





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