भगवन
"जप्ता है जिसका नाम हर मन,
जिसकी दया- करुणा को अपेक्षित हर जन,
श्रद्धा से रचित है जिसका कण- कण,
उसकी कुपित दृष्टि से भयभीत हर गण,
विविध भावों में एकता दर्शाता हर वर्ण,
दुखियों की वाणी सुनने को व्याकुल हर कर्ण,
नाम अनेक- सार एक
- वो हैं भगवन ll"
(I wrote this poem on 17th day of June in the year 1996)
"जप्ता है जिसका नाम हर मन,
जिसकी दया- करुणा को अपेक्षित हर जन,
श्रद्धा से रचित है जिसका कण- कण,
उसकी कुपित दृष्टि से भयभीत हर गण,
विविध भावों में एकता दर्शाता हर वर्ण,
दुखियों की वाणी सुनने को व्याकुल हर कर्ण,
नाम अनेक- सार एक
- वो हैं भगवन ll"
(I wrote this poem on 17th day of June in the year 1996)
No comments:
Post a Comment