Friday, September 13, 2019

भगवन

              भगवन

"जप्ता है जिसका नाम हर मन,
जिसकी दया- करुणा को अपेक्षित हर जन,

श्रद्धा से रचित है जिसका कण- कण,
उसकी कुपित दृष्टि से भयभीत हर गण,

विविध भावों में एकता दर्शाता हर वर्ण,
दुखियों की वाणी सुनने को व्याकुल हर कर्ण,

नाम अनेक- सार एक
- वो हैं भगवन ll"


(I wrote this poem on 17th day of June in the year 1996)

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