Karishhma
Tuesday, November 22, 2011
"आज सोचा दिल में तेरे नाम को रात के अँधेरे में गुम करके नया सवेरा देखूंगी,
यह सोच कर रात भर करवटों में काट दी...
सुबह के उजाले ने जब दस्तक दी,
तब जाना की रात भर तेरे नाम की स्याही चादर पर बिखरती रही,
सुबह तेरे नाम से सराबोर चादर मुझे ,अंगूठा दिखा हंसती रही...
तेरा नाम मेरे दिल से निकल कर
चादर से जो लिपट गया था."
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