Tuesday, March 8, 2022

मुबारकबाद महिला होने की।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

मुबारिक उनको, जो,
रातों की सिसकियां, दिल का दर्द और आंसुओं का समंदर
कहीं छुपा कर, 
सुबह की चाय में अपने अस्तित्व की चीनी घोल देती है।

मुबारिक उनको, जो
पिता की इज़्ज़त बनाये रखने को, खुद की हुई बे इज़्ज़ती का ज़हर, चुपके से पीकर,
घर के आंगन को गुलज़ार बनाने को इठलाने का नाटक कर लेती है।

मुबारिक उनको, जो
पीहर से विदा होती है पराई बन, आंखों से देखती है
बचपन के कमरे का छीनना, दीवार पे लगी अपनी तस्वीरों का नुचना,
पहुंच जाती है, उस घर जो उसको अपना नहीं कहता,पर हर पल उसको सजाती है।

मुबारिक उनको, जो 
परित्याग की धमकी पति से हर पल पाकर,
कभी शक्ल पर तो कभी रंग पर ताने सुनकर भी,
चट्टान की तरह उसी पति के सम्मान के लिए लड़ती है।

मुबारिक उनको, जो
भ्रूण को बेटा बनाने के लिए दवाई तक खाने पर बेटी पैदा करने की अपराधी बनती है
और एक करिश्मा हो जाता है, अंधविश्वास, प्रकृति से हार जाता है।

क्या मुबारकबाद दूं, इस दिन की,
जब ये दिन याद दिला देता है कि
21वी शताब्दी में भी लिंग विभेद चरम है

क्या अभिव्यक्ति दूं, नारी को जो खुद जननी हो कर भी
कहीं नहीं सुरक्षित है।

-करिश्मा

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