Monday, June 28, 2010

"शरणार्थी हूँ"

आज मैं शरणार्थी हूँ ,

देश अपना छोड़,

आत्मा भीतर से तोड़ ,

आज मैं शरणार्थी हूँ

माँ ने बताया था,

पृथ्वी पर हम भार हैं ,

ईश ने ऐसा क्यों रचा की

आज मैं शरणार्थी हूँ ,

नहीं ज्ञात क्या अधिकार हैं ,

क्या कर्तव्य हैं, मैं बेज़ार हूँ ,

आज मैं शरणार्थी हूँ।

कौन सा देश मेरा है ?

जहां पैदा हुआ था या

जिसने सहारा दिया?

प्रश्न आज उठा क्यूंकि

आज मैं शरणार्थी हूँ।

विडम्बना तो देख "करिश्मा"

जहां पैदा हुआ,उसने निष्कासित किया,

जहां सहारा मिला ,उसने प्रताड़ित किया ,

आत्मा से भी परे हूँ, क्यूंकि

आज मैं शरणार्थी हूँ।

मेरा मासूम बालक

इस देश का होगा या उस देश का

प्रश्नचिन्ह के साथ जीवन है,

आज मैं शरणार्थी हूँ ।

देवकी ने मानो जनम दिया

यशोदा ने जैसे पाला है

पर मैं कृष्ण तो नहीं

आज मैं शरणार्थी हूँ।

(करिश्मा)

14 comments:

  1. what a nice thought..
    keep it up..!

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  2. ur thought is very intelligent..!!

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  3. I am really impressed by your thoughts.

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  4. Keep publishing such thoughts..!

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  5. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )


    और भी लिखिये और दूसरे लोगों को पढ़ने का प्रयास करें ताकि लोग आपके विषय में अधिक से अधिक जान पायें.

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  6. करिश्माजी
    हिन्दी ब्लॉग जगत की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत है ।
    प्रस्तुत रचना शरणार्थी हूं भाव भरी रचना है ।
    आपकी पिछली पोस्टें भी खोल कर देखी ।
    विभिन्न विधाओं में लिखती हैं आप ।
    … और श्रेष्ठ सृजन के लिए मंगलकामनाएं हैं ।

    शस्वरं पर विजिट का भी आमंत्रण है आपको …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  7. शब्द और भाव अच्छे लगे - शुभकामनाएं - लेकिन आश्वस्त नहीं हो सका कि सिर्फ "एक शरणार्थी" की ही व्यथा है?

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  8. शरणार्थी के दर्द एवं अहसासों को बखूबी चित्रित करती एक हृदयस्पर्शी कविता के लेखन पर बधाई एवं साधुवाद। आज के हृदयहीन समाज में संवेदनशील लोगों की बहुत जरूरत है। अतः अपनी कलम की धार को तेज करती जायें। एक बार पुनः साधुवाद और धन्यवाद। शुभकामनाओं सहित।
    -आपका-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश, सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) (जो दिल्ली से देश के सत्रह राज्यों में संचालित है। इस संगठन ने आज तक किसी गैर-सदस्य, या सरकार या अन्य बाहरी किसी भी व्यक्ति से एक पैसा भी अनुदान ग्रहण नहीं किया है। इसमें वर्तमान में ४३२८ आजीवन रजिस्टर्ड कार्यकर्ता सेवारत हैं।)। फोन : ०१४१-२२२२२२५ (सायं : ७ से ८) मो. ०९८२८५-०२६६६

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  9. जिन्दा लोगों की तलाश!
    मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!


    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

    सच में इस देश को जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    हमें ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in
    http://baasindia.blogspot.com/
    http://presspalika.blogspot.com/

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  10. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  11. आपके ब्लाग पर आकर अच्छा लगा। चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। हिंदी ब्लागिंग को आप और ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है।
    इंटरनेट के जरिए अतिरिक्त आमदनी की इच्छा हो तो यहां पधारें -
    http://gharkibaaten.blogspot.com

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  12. सचमुच मुझे आपके ब्लॊग पर आकर बहुत अच्छा लगा. बहुत अच्छा लिखती है आप’ करिष्माजी. क्रुपया लिखते रहिये.मैने आपके ब्लॊग को फ़ोलो किया है. बेह्तरिन रचनाओ के लिये बधाई और शुभ कामनाये!

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