ज़िन्दगी आज ज़िंदा है, अपने पैरों पर खड़ी है, ऊर्जावान है, सजीव है।
एक ही पल में क्या हुआ, ज़िन्दगी ज़मीन पर पड़ी एक मुर्दा है, निष्क्रिय है, निर्जीव है।
हर पल का मोल जान के जी लो,
मुट्ठी न खोलो, हर लम्हा जी लो
कल के लिए क्या छोड़ना जब कल ही काल से जुड़ा है,
आज में जो स्फूर्ति है, वो कल में कहाँ है।।
-करिश्मा पाल
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