Karishhma
Wednesday, May 26, 2010
खिड़की के किवाड़ खटखट करते रहे, और मैं एकटक चाँद को निहारकर उसकी चांदनी की गहराई नापती रही, होश तब आया जब तेज़ हवा ने आँचल भिगो डाला,'करिश्मा 'तब आंसुओं से बूंदों को अलग कर न सकी
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